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सीटू के नेतृत्व में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका यूनियन ने न्यूनतम वेतन आईसीडीएस के संबंध में प्रधानमंत्री को लिखा पत्र*

*सीटू के नेतृत्व में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका यूनियन ने न्यूनतम वेतन आईसीडीएस के संबंध में प्रधानमंत्री को लिखा पत्र*

देश 24 लाइव न्यूज़ जिला ब्यूरो चीफ बालोद

रिपोर्टर- मोहम्मद इमरान राजा खान -9174400910

हिंदुस्तान स्टील इंप्लाइज यूनियन (सीटू ) दल्ली राजहरा के आह्वान पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका यूनियन ने न्यूनतम वेतन आईसीडीएस संबंधी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल 8 दिसंबर से 10 दिसंबर तक जिला मुख्यालय बालोद में किया एवं प्रधानमंत्री के नाम पत्र भेजा गया ।

पत्र में देश भर में केंद्रीय मंत्रियों के कार्यालयों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के धरने के मुद्दों का तत्काल समाधान न्यूनतम वेतन का भुगतान, आईसीडीएस @50 को मजबूत करने की मांग की है।

 

कुपोषण, विशेषकर बच्चों में, देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) योजना, जिसे अब सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 नाम दिया गया है, इस चुनौती से निपटने की एकमात्र समय योजना है जिसने कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर आदि को काफी हद तक कम किया है। आईसीडीएस ने इस वर्ष अपना सफल 50 वर्ष पूरा कर लिया है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने इसका उत्सव मनाने या यहाँ तक कि समीक्षा करने तक पर ध्यान नहीं दिया है।

 

निति आयोग ‌द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 की लागत से साझेदारी शुरू करना और पिछले एक दशक के दौरान बजट में लगातार कटौती से 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों के कामकाज को प्रभावित किया है । जो लगभग 10 करोड़ छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 2 करोड़ गर्भवती 1वो ppl प्लेमहिलाओं व धात्री माताओं को सेवा प्रदान करते हैं। पिछले आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, पिछले बजट में घोषित पोषण हेतु प्रति बच्चे की लागत में वृद्धि अभी तक लागू नहीं की गई है।

 

लगभग 27 लाख आंगनबा ड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अभी तक कर्मचारी/श्रमिक के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है और किसी भी श्रम कानून के दायरे में नहीं आती हैं। 2013 में ही 45वीं और 46वीं भारतीय श्रम सम्मेलनों के सर्वसम्मत सिफारिशें, उन्हें नियमित करने, न्यूनतम वेतन व सामाजिक सुरक्षा और पेंशन देने के लिए, अभी तक नहीं मानी गई हैं। 2018 से, भारत सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय का पुनरीक्षण नहीं किया गया है । वह है (केवल 2700 रुपये और सहायिकाओं को 1350 रुपये प्रति माह) है । सभी राज्यों के वेतन में एकरूपता नहीं है। 50 वर्ष की सेवा के बाद भी उन्हें कोई सामाजिक सुरक्षा, पेंशन वा सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2022 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन वादों के बावजूद, सरकार ने अभी तक इसे लागू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। इसके विपरीत, आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को परेशान किया जा रहा है और बुनियादी ढांचा प्रदान किए बिना ही डिजिटलीकरण, ई-केवाईसी और ओटीपी सत्यापन, एफआरएस आदि के नाम पर बड़ी संख्या में हकदारों (लाभार्थियों) को हटाया जा रहा है।

 

 

 

अब सरकार ने चार श्रम संहिताओं को अधिसुचित कर दिया है और दावा कर रही है कि सभी को वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी आदि मिलेगी ।लेकिन हम इनमें से किसी भी लाभ से वंचित हैं. और समय पर भुगतान भी नहीं मिलता है।

 

हम कई वर्षों से अपनी बुनियादी मांगें उठाते रहे हैं। हमने संबंधित मंत्रियों को ज्ञापन दिए हैं , स्वतंत्र रूप से और संयुक्त रूप से असंख्य संघर्ष किए हैं। लेकिन हमारे बुनियादी समस्याओं को कभी नहीं सुलझाया गया। इस परिस्थिति में हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था, इसलिए अन्य स्कीम वर्क – आशा और मिड डे मील वर्कर्स के साथ मिलकर, हम 1 दिसंबर 2025 से सभी राज्यों में केंद्रीय मंत्रियों के उनके निर्वाचन क्षेत्रों में कार्यालयों के सामने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का आयोजन कर रहे हैं।

*आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं द्वारा की गई मांगे*

 

👉 1. सरकार श्रम संहिताओं को तुरंत वापस ले। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को श्रम कानूनों के दायरे में लाएं।

 

👉2. आईसीडीएस @ 50 को संस्थागत बनाने के लिए तत्काल कानूनी और प्रशासनिक उपाय करें !

 

👉3.45 वीं और 46वीं भारतीय श्रम सम्मेलनों की सिफारिशों को लागू करें तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सरकारी

कर्मचारियों के रूप में नियमितीकरण, 26,000 रुपये प्रति माह न्यूनतम वेतन, 10,000 रुपये प्रति माह पेंशन और पीएफ व ईएसआई सहित अन्य सभी सामाजिक सुरक्षा उपाय। नियमितीकरण लंबित होने तक, स्कीम वर्कर्स के लिए एक वेतन आयोग गठित करें जो उनके कार्य और सेवा शर्तों के सभी पहलुओं पर विचार करे।

👉4. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए तुरंत न्यूनतम वेतन की घोषणा करें। केंद्रीय बजट 2027 मैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए न्यूनतम वेतन और ग्रेच्युटी का 60% हिस्सा आबंटित करें।

 

👉 5. आंगनबाड़ी लाभार्थियों की प्रति इकाई लागत बढ़ाएं। आंगनवाड़ी केंद्रों में केवल ताज़ा पका स्थानीय भोजन दिया जाए।

 

👉6. देश भर के सभी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए एक समान सेवा शर्तें लागू किया जाए।

👉 7. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं को कोई गैर-आईसीडीएस कार्य नहीं सौंपी जाए ।

 

👉8. एफआरएस की अनिवार्य लागू करना तुरंत बंद करें। सभी पात्र हकदारों को सभी सेवाएं सुनिश्चित करें। डिजिटलीकरण के लिए वाई-फाई सहित सभी सुविधाएं प्रदान करें।

 

👉 9. आंगन बाड़ी केंद्रों को नोडल एजेंसियों के रूप में नामित करते हुए बच्चों को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभऔर शिक्षा (ईसीसीई) का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाएं।

👉 मानव संसाधन के साथ स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखते हुए आंगन बाड़ी-कम-क्रेच विकसित करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) वापस लें।

 

👉10. भारत सरकार सर्वोच्च न्यायालय के ग्रेच्युटी आदेश और गुजरात उच्च न्यायालय के नियमितीकरण व न्यूनतम मजदूरी आदेश को तत्काल प्रभाव से शब्दशः और भावनात्मक रूप से लागू करे।

 

 

मानव संसाधन के साथ स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखते हुए आंगनबाड़ी-कम-क्रेच विकसित करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) वापस लें।

 

इस कार्यक्रम में हिंदुस्तान स्टील इंप्लायज यूनियन (सीटू ) से कामरेड विनोद मिश्रा कामरेड जे. गुरुवूलू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन से संगीता महंत रंभा पवार पदमा पटेल उत्तर देवदास सुनीता मंडावी हेमलता साहू रेशमा धर्मेश्वरी दुबे मनकेसरी कमलेश्वरी विश्वकर्मा एवं सविता टेकाम के साथ हजारों की संख्या में आंगनबाड़ी सहायिका एवं कार्यकर्ता उपस्थित हुए ।

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